Tuesday, November 16, 2010

Mere Anubhava

मेरे अनुभवों को मैंने शब्दों मे उकेरा है
आस पास विषयो का डेरा है,
कलम जब हाथ मैं चड़ता है
तोंह खयालो का जाल मन मे बुन्नता है,
कभी शुन्य को चुनता हूँ तोंह
कभी प्रकाश को भी धुनता हूँ.


मुझे पता है मेरी कविताये
न होती कुछ ख़ास है
बस ये तोंह मेरी कोरी बकवास है
पर लिखना मेरा शौक है,
इसलिए कलम पे मेरी धौक है.

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