तारों की ऊंचाई नहीं, चमक चाहिए मुझको,
आसमान की गहराई चाहिए मुझको.
न तख्ते-इ-ताज न कोई रियासत-राज चाहिए मुझको,
दिल -इ -देहलीज़ मे एक कोना चाहिए मुझको .
मैं तनहा होकर भी बेफिक्र हूँ,
साथ किसी का नहीं चाहिए मुझको,
बस तुम्हारे साथ होने का इक पल का भरम चाहिए मुझको .
आरजू-इ-दिल इतनी हैं ,
हिसाब लगाना न आता मुझको,
हाँ!!! पर हर चाहत की खाविश में शामिल दिल क जज़्बात चाहिए मुझको.
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