Tuesday, November 16, 2010

Aarzoo

तारों की ऊंचाई नहीं, चमक चाहिए मुझको,

आसमान की  गहराई चाहिए मुझको.
न तख्ते-इ-ताज न कोई रियासत-राज चाहिए मुझको,
दिल -इ -देहलीज़  मे एक कोना चाहिए मुझको .

मैं तनहा होकर भी बेफिक्र हूँ,

साथ किसी का नहीं चाहिए मुझको,

बस तुम्हारे साथ होने का इक पल का भरम चाहिए मुझको .


आरजू-इ-दिल इतनी हैं ,

हिसाब लगाना न आता मुझको,
हाँ!!! पर हर चाहत की खाविश में शामिल दिल क जज़्बात चाहिए मुझको.

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